रिहाई - 9-5 ऑफिस लाइफ
रिहाई - 9-5 ऑफिस लाइफ
इस कोफ़्त से रिहा होना है मुझे ।
जीने का मक़सद ढूंढना है मुझे ।
कहा था किसी ने के दो पैसे मिलेंगे तो ख़ुशी होगी इस चेहरे पे तेरे ।
उन्ही दो पैसों की तलाश में निकलना है मुझे ।।
इन खोखली अठखेलियों के बीच रह कर भी स्वयं में झांकना है मुझे ।
खुद को आईने में देख उस शून्य को मिटाना है मुझे ।
बस अब एक जंग ऐसी है ।
उस में ख़ुद को ख़ुद ही से विज़य बनाना है मुझे ।
इस कोफ़्त से रिहा होना है मुझे ।
इस कोफ़्त से रिहा होना है मुझे ।
