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Vinamra Jain

Abstract Inspirational

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Vinamra Jain

Abstract Inspirational

एक अलग सुबह

एक अलग सुबह

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आज की सुबह कुछ अलग थी

आज की सुबह में कुछ तो क़मि थी


जिस चहक से आज सुबह हुई

वह एक अरसे पहले सुनी थी


रोज़ की आपाधापी के बीच

एक अल्प विराम सी थी


इस नवीनतम पूर्ण निस्तब्धा की

अनुभूति कुछ अलग सी थी


मानसिक शोर में सबसे आगे

निकलने की होड़ नहीं थी

 

परिंदो के पर में भी एक सुर होता है,

यह एहसास की कमी थी


सिर्फ़ अपनों की आवाज़ सुनने में

एक अलग ख़ुशी सी थी


आज की सुबह कुछ अलग थी

आज की सुबह कुछ अलग थी।


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