STORYMIRROR

SHIVAM AGRAHARI

Abstract

3  

SHIVAM AGRAHARI

Abstract

रात के अंधेरे साए में

रात के अंधेरे साए में

1 min
375

रात के अंधेरे साए में एक

ज्योति बुझगई वासना और हैवानियत के नाम।

लेकिन हमारे मन को यूंही

प्रज्वलित करती रहेगी सुबह और शाम।

कि माफ नहीं करेगा हिंदुस्तान

ऐसा घिनौना काम।

चाहे उसके लिए चुकाना पड़े

कोई भी दाम।

अपराधों को रोकने के लिए

हमें बालिकाओं से ज़्यादा

बालकों पर कसनी होगी लगाम।

क्यूंकि परस्पर सहयोग से ही

 ऊंचा होगा पूरे जगत में भारत का नाम।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from SHIVAM AGRAHARI

Similar hindi poem from Abstract