प्यारा बचपन, मीठी यादे
प्यारा बचपन, मीठी यादे
क्या आपने देखा है? भजनो और गुरूबाणी से महकते आँगन को,
बिजली गुल हो जाने से शोर मचाने वाले को,
बिजली आ जाने पर, खुशियाँ मनाने वालो को,
हर त्यौहार पर अपनत्व निभाने वालो को
टूटी साइकिल चला कर भी पिताजी संतोष कमा कर,लाते थे।
माता जी धैर्य का संचयन करके खुशियो से घर खर्च चलाती थी।
छोटे घरो मे खुशियाँ आपार होती थी।
आकाशवाणी, दूरदर्शन संग संस्कारो की अमिट छाप होती थी।
घर के आंगन मे बुजुर्गो का आशीर्वाद होता था।
सब अच्छा होगा ऐसा दादी को विश्वास होता था।
काश आज की पीढ़ी सुखद अहसास ले पाती।
दिखावट से दूर , पडोसी भी रिश्तेदार होता था।
आजकल एक कमरे मे बैठकर मोबाइल, कम्पूटर, स्मार्ट टीवी मे कैद है।
घर के अगले कमरे की खबर से बेखबर
सोशल मीडिया से इम्प्रेस है।
वाह रे बीते जमाने तेरी यादो मे
हम आज भी फ्रेश हैं।
