पिता एक एहसास
पिता एक एहसास
पिता एक एहसास
जीने का है विश्वास
पग-पग चलते सदा
देते स्नेह आशीर्वाद
मां जीवन में सर्वोपरि
पिता सिर का सरताज
उनकी उम्मीदें हैं मुझसे
उन्हें पूरा करने का प्रयास
दिन भर पिसते माता-पिता
जैसे हों चक्की के दो पाट
अपनी जीने की इच्छा खत्म
मुझमें देखते हैं वो घर-संसार
पिता हैं मेरे पंखो का परवाज
परछाई बनने का करता प्रयास
दुःख-संकट को खुद हर लेते
हम पर ना आने देते कभी आंच
घड़ी की सुई हो जैसे ऐसे चलते
ना रूकते ना थकते ना झुकते
जीवन है उनका चलने का नाम
बेटे के बाद जबसे मैं पिता बना हूं
चलता पदचिह्नों पर करता मनन
उनके संघर्षों का करता अनुसरण
पिता का एहसास कराया है आपने
ईश्वर ओर पिता दोनों को मेरा नमन।।
