पिंजरा
पिंजरा
पिंजरा तोड़ के उड़ जाना चाहती हुं,अपने लिए कुछ करना चाहती हुं,बेड़िया तोड़ के भाग जाना चाहती हूंकाश कोई वक़्त को यहीं रोक देंये दर्द और मैं नहीं चाहती हूं
उस आसमान में उड़ जाना चाहती हूंअपनी मोहब्बत से मिलना चाहती हैंइस पिंजरे से नफरत है मुझेइन बेड़ियों से शिकायत है मुझेशायद खुद से ही रंशिज है मुझेना जाने क्यों मैं हूं इस जगह दफनकि बस यहां से जाने के लिएपिंजरा तोड़ना चाहती हूं
BY ANSHUL
