STORYMIRROR

Sanjay Verma

Abstract

4  

Sanjay Verma

Abstract

फूलों की बातें

फूलों की बातें

1 min
469

फूलों का ये कहना है 

दिल की बातें दिल में ही रखना है 

छीन ले जाता कोई खुश्बू 

बस इस बात का तो रोना है।


फूल बिन सेहरे- गजरे 

उदास हुए 

याद नहीं क्यों 

सांसे उतनी ही बची फूलों की 

न जाने तितली-भोरें 

फूलों के क्यों खास हुए।


उड़ा न पवन 

खुशबुओं को इस तरह 

मोहब्बतें भी रूठ जाएगी 

बेमौसम के पतझड़ की तरह 

कुछ याद रहेगी खुशबुओं की 

जब तक रहेगी 

धड़कन से सांसों की तरह। 


खुश्बुएं भी रूठ जाती फूलों से 

काँटों की पहरेदारी बनती

दगाबाज की तरह 

तोड़ लेता कोई जैसे 

अपने रूठे को मनाने की तरह। 


चाह है बनना

पेड़ के फूलों की तरह 

क्यारियों के फूल तो 

अक्सर टूटा करते 

इंसान भी इस तरह क्यों

चोर बना करते।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract