STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Classics Inspirational

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Classics Inspirational

नव वर्ष

नव वर्ष

1 min
388

किसलय ने मुंह खोला है 

समय का पंछी बोला है 

ग़म की रातें निकल गई

संकट की घड़ियां टल गई


आशा बलवती होने लगी

उम्मीदें सपने पिरोने लगी 

भाग्य ने छक्का लगाया है 

देख, साल 2024 आया है 


झोली भर लो सपनों से 

मेल मिलाप हो अपनों से 

खुशियों की दौलत चमके 

मस्ती वाली सेहत दमके 


आसमान हो कदम तले 

अब ना कोई भरम पले

सब चेहरों पर हो उल्लास

नव वर्ष हो सबके लिए खास। 


नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy