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Lalita Rautela

Abstract

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Lalita Rautela

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नन्हा तारा

नन्हा तारा

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अकेला है तो क्या,

विशालकाय आकाश में

अपनी चमक बिखेर रहा।

जो उन्नींदे हैं और जो

सो चुके...

उनकी आंखों में नवजीवन के

सपने बन तैर रहा।।


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