STORYMIRROR

Ankit Dubey

Abstract

3  

Ankit Dubey

Abstract

निश्चय

निश्चय

1 min
281

एक मुट्ठी में सारा आसमाँ भरना है

या एक छलाँग में समंदर तैरना है 

तेरी होगी ये कायनात एक दिन देखना 

तू बस तय तो कर तुझे क्या करना है।


ये खुशफ़हमी न रहे कि सब आसान है

न ये डर हो कि सामने सिर्फ़ तूफ़ान है 

करनेवाले और डरनेवाले दोनों ही हैं दुनिया में

तू बस तय कर इनमे से तू कौनसा इंसान है।


ज्वाला की तरह तेज जलना है 

या मोम की तरह धीरे पिघलना है 

रास्ते तो दोनों ही रौशनी की ओर जाते हैं 

तू बस तय कर तुझे किस पर चलना है।


मुश्किलें बहुत सी होंगी ये तो सब कहते हैं 

अच्छा बुरा सब सहेगा तू जैसे सब सहते हैं 

तो क्या अलग है जिससे महान तू बन पायेगा ?

तू बस तय कर के हर ठोकर के बाद तू दुगुना जोर लगाएगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Ankit Dubey

Similar hindi poem from Abstract