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Sachin Singh

Romance Fantasy Inspirational

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Sachin Singh

Romance Fantasy Inspirational

मुसाफ़िर

मुसाफ़िर

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घर के आँगन में मुसाफ़िर सा हूँ, 

नाराज मुझसे मेरे ही आशियाने की चारपाई है।


दो पल ना चैन से बैठ पाता हूँ, 

परिवार के साथ बहुत सी गुफ़्तगू करनी बाकी है। 


रोटी महँगी हो रही है , 

पानी भी अनमोल से मोल दार हो गया।


सर पर छत लाने के लिए, 

खुले आसमान का मुसाफ़िर हो गया हूँ। 


गुलाबी, नारंगी, जामुनी, कत्थई 

नोटों की परते, मन की गिरह बन रही है। 


फर्ज निभाने के खातिर, 

अपनी ही इच्छाओं का कर्जदार हो गया हूं। 


जीने के लिए यह सफर तय करना ही है, 

देख जिंदगी, मैं तेरी राह का एक मुसाफ़िर हूँ।। 


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