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Narendra Aatish

Drama


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Narendra Aatish

Drama


मुक्तक

मुक्तक

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देखा हैं मैंने बच्चो के मुख पर मुस्कान नहीं हैं,

फुटपाथों पर सोते रहने को उन्हें मकान नहीं हैं||


पाँव के छाले बोलते लहु छलकना लिखा नसीब में,

रोटी मिले सुकून से ऐसा कोई विधान नहीं हैं||



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