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Manju Saini

Inspirational

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Manju Saini

Inspirational

मुक्तिपथ

मुक्तिपथ

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मुक्तिपथ की ओर अग्रसर….

प्रतीक्षा अनवरत यूँ ही सदियों से

दहकती अग्नि सी इच्छाओं की

जो अपूर्णता लिए मुँह खोले ही

अनंत की राह पर अग्रसित होती हुई

शरीर के क्षय होने में प्रतीक्षारत

कब हो आहूत शरीर को क्षणिक हैं

मुक्तिपथ की और अग्रसर….

एक बुलबुला सा पर अंतहीन सा

फिर से वायु को लालायित सा

जीवन से कभी चिर मुक्ति को अग्रसर

स्वयं आहूत होने की राह पर

न जाने कितने अग्निपथ पार किये

मुक्ति मार्ग तक के सफ़र में आशातीत हुए

मुक्तिपथ की और अग्रसर….

स्वयं की सार्थकता को शिरोधार्य मान

सीमित साधन से ही सार्थक मानने की चूक

बस यही तो है जीवन उलझाव जिसमे कभी

सीधा मार्ग प्रतीत ही नही हुआ बस

अंतहीन यात्रा को निकले सभी हमसफ़र बन

कब ड़ोर छूट जाए कब मिथ्या भंग हो

मुक्तिपथ की और अग्रसर….

अतृप्त सा जीवन कब बढ़े तृप्ति की और

अनंत कष्टकर,अग्निशमन सा अनवरत मन

सुप्तावस्था से जाग्रत हो चल पड़े

एक अनन्य मार्ग पर स्वयं को पहचानने

मिथ्या व मायाजाल से मुक्त हो

अपने पथ पर पुनः नवक्रान्ति उत्सर्जन को

मुक्तिपथ की और अग्रसर….



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