STORYMIRROR

Sandeep Raaz Anand

Abstract

4  

Sandeep Raaz Anand

Abstract

मुझे दिल से निकाला जा रहा है

मुझे दिल से निकाला जा रहा है

1 min
288

मुझे दिल से निकाला जा रहा है।

मिरा अब ख़त जलाया जा रहा है।


कहो उससे चला आये यहां भी

उसे कबसे पुकारा जा रहा है।


मुझे यूँ देखना फिर मुस्कुराना

मिरा अब दिल चुराया जा रहा है।


लरजते होंठ, ये आँखें कँटीली

मुझे जादू दिखाया जा रहा है।


होकर रुस्वा तेरी महफ़िल से देखो

मोहब्बत का सितारा जा रहा है।


कि अब 'आनन्द' को बरबाद समझो

उसे चाहत सिखाया जा रहा है।




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract