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Sandeep Raaz Anand

Abstract

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Sandeep Raaz Anand

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मुझे दिल से निकाला जा रहा है

मुझे दिल से निकाला जा रहा है

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मुझे दिल से निकाला जा रहा है।

मिरा अब ख़त जलाया जा रहा है।


कहो उससे चला आये यहां भी

उसे कबसे पुकारा जा रहा है।


मुझे यूँ देखना फिर मुस्कुराना

मिरा अब दिल चुराया जा रहा है।


लरजते होंठ, ये आँखें कँटीली

मुझे जादू दिखाया जा रहा है।


होकर रुस्वा तेरी महफ़िल से देखो

मोहब्बत का सितारा जा रहा है।


कि अब 'आनन्द' को बरबाद समझो

उसे चाहत सिखाया जा रहा है।




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