मन
मन
जब मन व्यक्ति को वश में करता है
तो वह न केवल व्यक्ति को ही बल्कि उसकी क्रियाओं को भी वश में करता है।
वो उसके भय को , उसकी खुशी को , उसके गम को, उसके विचार , खयाल,
उसकी भावनाओं और उसके शब्दों पर भी नियंत्रण करता है।
सचेत है, तो सचेत सही
आफ़त तो हो ही जाती है।
मन पर बहुत कम लोग ही विजय प्राप्त कर सकते हैं
और वो ही लोग हैं जो जीवन जीना जानते है ।
साधारण व्यक्ति हमेशा तैरता रहता है , मन के प्रभाव में ।
और बोधी चुप कराता है, अपने मन को।
मन मन की बात में, मन मन का न हो सका
मन से जो करना चाहा , मन से न हो सका ।
मन पर जो काबू पाए , जीवन वो ही जी सका।
मन पर जो बात ना ले जाए , सब्र घूंट का वो ही पी सका।
