Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Inspirational Thriller
सोच
और
समझ
अगर
सकारात्मक
है
तो
मनुष्य
को
महान
ही
नहीं
बल्कि
महानतम
बनाने
में
देर
लगती
कर्मों
के
आधार
पार
आम
इंसान
महात्मा
बनता
है।
प्रेम समर्पण ...
बेटी
रिश्तों का कम...
प्रेम सर्वव्य...
प्रेम निशब्द
प्रेम
अयोध्या लोटे सीता और दोनो भाई, ऐसा आनंद था छाया, मंगल गीत और ढोल नगाड़े , उत्सव था जैस अयोध्या लोटे सीता और दोनो भाई, ऐसा आनंद था छाया, मंगल गीत और ढोल नगाड़े , उत्...
वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ। वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ।
वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना ! वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना !
सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना ----------- सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना -----------
मैं और कुछ नहीं जानती बस इतना जानती हूँ कि उसने प्रेम किया था। मैं और कुछ नहीं जानती बस इतना जानती हूँ कि उसने प्रेम किया था।
जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो। जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो।
लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते। लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कु...
भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया। भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया।
इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व। इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व।
तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी। तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी।
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं! और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं!
लेकिन मेरा यकीं करो, मैंने सुनी है चीख उन पंछियों की जिनके पर कतर दिए गए : लेकिन मेरा यकीं करो, मैंने सुनी है चीख उन पंछियों की जिनके पर कतर दिए गए :
अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी। अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी।
ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँगा। ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँ...
मन की सारी बात बताना ए दोस्त तू कल फिर आना. मन की सारी बात बताना ए दोस्त तू कल फिर आना.
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
नारायण के भक्त अरु, गंगा के सुत वीर। कृपा आपनी कीजिए, प्रमुदित रहे शरीर।। नारायण के भक्त अरु, गंगा के सुत वीर। कृपा आपनी कीजिए, प्रमुदित रहे शरीर।।
मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को
लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥ लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥