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Dr.Ashish Kumar Soni

Inspirational

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Dr.Ashish Kumar Soni

Inspirational

मेरी कलम

मेरी कलम

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एक कलम ,मेरी कलम;

मेरी अपनी,प्यारी कलम।

मेरी पहचान,मेरी कलम;

मेरी हस्ती,मेरी कलम।

मेरी कहानी,कहती कलम;

मेरी किस्मत,लिखती कलम।

मेरा बचपन,मेरी कलम;

मेरी जवानी, मेरी कलम।

मेरी रवानी ,मेरी कलम;

मेरी ज़िन्दगानी,मेरी कलम।


बचपन में ,रबर से संग्राम करती, मेरी कलम;

शार्पनर से निखरती सँवरती,मेरी कलम।

निखर-निखर ,ढलती -घटती, मेरी कलम,

जीवन की यही रीत है ,ये कहती, मेरी कलम।


महक मेरे गाँव के मिट्टी की ,लेकर आती, मेरी कलम,

मेरे बाबू जी की आवाज को ,जीवित बनाती ,मेरी कलम;

राखी को संजोए लिफाफे में ,पूरे परिवार का हृदय सुनाती, मेरी कलम;

प्रेम पत्र में मेरी मुहब्बत को ,सच्चा बनाती, मेरी कलम।


सबके दिलों में मुहब्बत को, ज़िंदा रखती, मेरी कलम;

इंसानियत की मिसाल को ,हर युग में पेश करती, मेरी कलम ।


न तोल, न मोल ,मेरी कलम;

ताक़त बड़ी, दिखती छोटी कलम।

सरकार बनाती बदलती ,मेरी कलम;

मेरे देश को महान बनाती मेरी कलम।


एक कलम,मेरी कलम;

मेरी अपनी,प्यारी कलम।

मेरी पहचान,मेरी कलम;

मेरी हस्ती,मेरी कलम।



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