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Dr.Ashish Kumar Soni

Inspirational

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Dr.Ashish Kumar Soni

Inspirational

परिंदा

परिंदा

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भेड़ों की इस भीड़ में ,

रह न तु इस नीड़ में;

फैला दे पंख, फलांग भर 

लगा छलांग ,उड़ान भर।


ऐ मुसाफिर ,परिंदा बन,..

मुर्दों की भीड़ में, ज़िंदा बन;

छूनी है ऊँचाइयाँ ,कर ले प्रण;

कर दिखा कुछ ऐसा,...

गुणगान करे जन-गण-मन।


न डर तू किसी से; न छिप तू किसी से;

न झिझक ,न कभी शर्मिंदा बन;

बढ़ा ले कदम ,मन्ज़िल की ओर,..

ऐ मुसाफिर ,परिंदा बन ।


मार ठोकर पत्थरों को,

चीरता चल आँधियों को;

हवायें रुख में कर ले अपने,

बढ़ा दे कदम; परिंदा बन।

 

अपनी शक्ति पहचान ले तू,

तुझमें है वो ताक़त ,जान ले तू;

तू ही है वो जो, दुनिया को दिखा सकता है;

आगे बढ़ना क्या है, ...

ज़माने को सिखा सकता है।


बना दे ,जो बना नहीं,

दिखा दे ,जो दिखा नहीं।

रणबीर तू ,आह्वान बन,

भविष्य का प्रकाश बन।


प्रज्ज्वल ,उज्ज्वल, उन्मुक्त बन;

प्रखर, मुखर ,स्वच्छन्द बन।

अटल ,ना टूट ,शौर्य बन;

कष्ट सामने ,रौद्र बन ।


थकी दुनिया में जान बन,

परिंदा बन, तू महान् बन।

मुर्दों की भीड़ में, ज़िंदा बन;

ऐ मुसाफ़िर, तू परिंदा बन।

ऐ मुसाफ़िर ,तू परिंदा बन।



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