STORYMIRROR

fp _03🖤

Abstract Drama

4  

fp _03🖤

Abstract Drama

मैं नहीं चाहती

मैं नहीं चाहती

1 min
318

मैं बिल्कुल नहीं चाहती, तुम इधर आओ

मैं तुम्हें नहीं देखना चाहती।

मैं पहले से ही परेशान हूं, उलझी हुई हूं।

तुम बस दूर रहो, मुझसे दूर, मेरी उलझनों से,

मेरे विचारों से, मेरी रूह से, मेरी ज़िंदगी से।


तुम्हारे एक फोन कॉल ने फिर मेरे अंदर के

ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया है

ये बहुत मुश्किल हो गया है।

मैं बस लिखना चाहती हूं।

ये कुछ भी काल्पनिक नहीं है, सच्चाई है 


वो सच्चाई जिससे मैं भाग रही हूं, निरंतर 

बस मैं थक हुई हूं। अब आराम चाहती हूं।

तुमसे, तुम्हारे ख्यालों से या फिर खुद के विचारों से 

उस संघर्ष से जो मैं कई समय से कर रही हूं।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from fp _03🖤

untitled

untitled

1 min पढ़ें

untitled

untitled

2 mins पढ़ें

untitled

untitled

1 min पढ़ें

untitled

untitled

1 min पढ़ें

पुरुष

पुरुष

1 min पढ़ें

dil se

dil se

1 min पढ़ें

..

..

1 min पढ़ें

आधार

आधार

1 min पढ़ें

Untitled

Untitled

1 min पढ़ें

Untitled

Untitled

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract