STORYMIRROR

Sunita Shukla

Abstract

3  

Sunita Shukla

Abstract

मानव और मशीन

मानव और मशीन

1 min
203

मानव और मशीन का

सम्बन्ध भी अजीब है।

आज मशीन ही मानव के,

सबसे अधिक करीब है।

सहयोग की सीमा से कहीं आगे

मानस पटल पर छा गई,

पूर्ण निर्भर हो गया और 

पंगुता सी छा गई।

चाह थी पकडूं समय को

समय से ही दूर है, 

सहजता और स्वास्थ्य पाने

को अरे मजबूर है।

प्राकृतिक संसाधनों पर

ये कुठाराघात है 

हो उचित उपयोग इसका

इस समझ की बात है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract