STORYMIRROR

Muskan Kumari

Inspirational

4  

Muskan Kumari

Inspirational

माँ

माँ

1 min
400

हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा है

हम कुंठित हैं तो वह एक अभिलाषा है

बस यही माँ की परिभाषा है।


हम समुंदर का है तेज तो वह झरनों का निर्मल स्वर है

हम एक शूल है तो वह सहस्त्र ढाल प्रखर


हम दुनिया के हैं अंग, वह उसकी अनुक्रमणिका है

हम पत्थर की हैं संग वह कंचन की कृनीका है


हम बकवास हैं वह भाषण हैं हम सरकार हैं वह शासन हैं

हम लव कुश है वह सीता है, हम छंद हैं वह कविता है।


हम राजा हैं वह राज है, हम मस्तक हैं वह ताज है

वही सरस्वती का उद्गम है रणचंडी और नासा है।


हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा है।

बस यही माँ की परिभाषा है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Muskan Kumari

Similar hindi poem from Inspirational