लड़कियाँ
लड़कियाँ
लड़की होने से बड़ा पाप
नहीं हो सकता इस दुनिया में,
सब कुछ होके भी
कुछ नहीं होता दुनिया में,
अपने आप को भी बेच के हम
अपनी आज़ादी नहीं खरीद सकते।
इतने लाचार है कि,
हुनर होके भी कुछ नहीं कर सकते,
बैठे घर वाले राह में
अच्छा अमीर लड़का देख
के हुनर के साथ लड़की को
विदा कर घर में बिठाएंगे,
लड़के भले ही ना पढ़े
लेकिन इंजिनियर उसे बनाएंगे।
लड़की को भेजा होता
अपनी हर बार जहां
उसे कुछ सीखना था तो,
आज कितनी किरण बेदी
और मिताली राज
रोटियां ना बेलती घर में।
लड़की को क्या चाहिए
कहीं उससे भी कोई पूछे
क्यों हर बार आपकी पसंद की
फिल्ड आपकी पसंद की जॉब
आपकी पसंद के लड़के से
शादी करे वो भी एक इंसान है।
उसकी भी कोई उम्मीद है
अपने जीवन से,
उसके भी अपनी सोच है जिंदगी से,
उसे भी मन भर जीना है,
खुली हवा में सांस लेना है,
मन चाहे वहा घूमना है।
क्यों हर बार लड़की के घर
बाहर जाने पर पंचायतें लगाई जाती है
और फिर रोक दी जाती है
और फिर बोला जाता है
लड़कियां अभिशाप है।
कितना भी अभियान चलालो
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ',
बेटी बच भी गई पढ़ भी
लिया बाद में क्या ?
वहीं चुल्हा चौका
कितना भी ज़माना आगे बढ़ जाए
लड़कियां, लड़कियां ही रहेंगी
वहीं बेड़ियों के साथ।
