STORYMIRROR

Anusha Dixit

Abstract

3  

Anusha Dixit

Abstract

कुछ रंग मुझे ला देना।

कुछ रंग मुझे ला देना।

1 min
334

पापा इस बार होली पे, कुछ रंग मुझे ला देना,

हरा, पीला, नीला, लाल इन गालों पर लगा देना।


कुछ बोलते क्यों नहीं क्यो सब रोते हैं,

मां का सिंदूर क्यों ये धोते हैं।


क्यों तुम्हारी वर्दी केवल लाल रंग से रंगी है,

क्यों दादा जी आँख पूरी रात जगी है।


पाप ये तुमको कहाँ ले जाते हैं,

तुम तो सो रहे हो फिर क्यों ये तुम्हें जलाते हैं।


अभी तो तुम्हें मेरे लिए रंग भी लाना है,

मेरे नन्हे गालों पर तुमको इन्हें लगाना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract