STORYMIRROR

Manmohan Bhatia

Abstract

3  

Manmohan Bhatia

Abstract

कुछ नहीं

कुछ नहीं

1 min
459

कुछ पाने की इच्छा है

कुछ ऊँचा जाने की इच्छा है

कुछ दूर तक देखने की इच्छा है

कुछ कल को आज पाने की इच्छा है।


कुछ नहीं मिलने का डर लगा रहता है

कुछ अनहोनी होने का डर लगा रहता है

कुछ अपनों के संग रहने की इच्छा है

कुछ दूसरों को मित्र बनाने की इच्छा है।


कुछ सफलता की सीढ़ी पर चढ़ जाने की इच्छा है

कुछ असफलता के डर से नीचे उतरने की इच्छा है

कुछ नहीं मुझे बहुत कुछ देखने की इच्छा है

कुछ नहीं बस मुझे आकाश की ऊंचाई छूने की इच्छा है।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract