Revolutionize India's governance. Click now to secure 'Factory Resets of Governance Rules'—A business plan for a healthy and robust democracy, with a potential to reduce taxes.
Revolutionize India's governance. Click now to secure 'Factory Resets of Governance Rules'—A business plan for a healthy and robust democracy, with a potential to reduce taxes.

कर्मों की स्याही

कर्मों की स्याही

1 min
234


कागज़ की हैं जिंदगी

न जाने कब उड़ जाएगी

शरीर का बोझ लेकर

चलती हैं आत्मा कि जिंदगी।


वरना कब कि उड़ जाती,

मिट जाती जिंदगी

स्याही से कुछ तो

लीखेंगे ब्रम्हाजी।


कर्मों की स्याही से

कुछ तो हमें भी

लिखना हैं जिंदगी।


वरना कब की उड़ जाती,

मिट जाती जिंदगी

आत्मा की शांति के लिए 

जीते जी कुछ करना है।

 

इस धरती माँ का 

कुछ तो ख्याल करना है

धरती पर चलती है जिंदगी

वरना कब की उड़ जाती

मिट जाती जिंदगी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract