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Kavi Sharad Wakeel

Abstract

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Kavi Sharad Wakeel

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कोरोना का कहर

कोरोना का कहर

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घरों में बंद नौकर मालिक सब कई दिनों से

मिले ही नहीं हम और तुम भी कई दिनों से


कोरोना ने बता दी है सबको उनकीऔकात

हाथ बांधे बेबस से सब खड़े हैं कई दिनों से


वैलेंटाइन की माला जपते रहते थे दिनरात

रट रहे क्वॉरेंटाइन क्वॉरेंटाइन कई दिनों से


गरीब बस्तियों में कभी जो झांके ही नहीं

बांटते फिर रहे वहां राशन वो कई दिनों से


फर्क मिटा दिया है गरीबी और अमीरी का

लाशें साथ दफन हो रही हैं कई दिनों से


पिज्जा, बर्गर, सैंडविच से बन गई है दूरियां

गए ही नहीं वह मेकडॉनल्ड कई दिनों से


देसी, अंग्रेजी, मसाला, ब्रांडी सब भूल गए

चाय पीकर गुजारा कर रह हैं कई दिनों से


सिनेमा, माल, मल्टीप्लेक्स हुई दूर की कौड़ी

घरों में ही देखते हैं रामायण वो कई दिनों से


एक विषाणु बन गया जान का दुश्मन "वकील"

 चल रहा दुनिया में वायरस का दौर कई दिनों से।


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