STORYMIRROR

Nishkka Oswal

Abstract

4  

Nishkka Oswal

Abstract

कोरोना का कहर

कोरोना का कहर

1 min
273

हम पंछी इस खुले आसमान के,

क्या पिंजरे में बंद रह पाएंगे?

किसने सोचा था, एक वायरस से

घरों में लौक हो जाएंगे।


शुरू हुआ ये चीन से,

फैला पूरे विश्व में।

छूने से ये फैलता है,

बारह घंटे ये रहता है।


संभल जाओ, सुधर जाओ,

घरों में कैद हो जाओ।

अपने आप को क्वोरंटाइन करके,

खुद को और देश को बचाओ।


आओ सब मिलकर प्रण लें,

सेनटाइसर और मास्क इस्तेमाल करें।

सामाजिक दूरी बनाकर,

इस महामारी पर विजय पाए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract