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चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज

Abstract Romance

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चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज

Abstract Romance

कोई भी मौसम आए

कोई भी मौसम आए

1 min
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कोई भी मौसम आए और जाए,

मेरा दिल तेरे लिए ही धड़केगा


बदल जाए ज़माना,

तेरा दीवाना न बदलेगा।


 मैंने तुझसे, जो वादा किया,

 तेरा आशिक़ निभाएगा।


मुझ पर भरोसा कर लो ! तुम,

तुम्हें इतना यक़ीन कौन दिलाएगा ?


तुमको मुझसे अच्छा मिल जाएगा,

मेरे जैसा तुम को कौन चाहेगा ?


मेरे सब्र का कितना इम्तिहान लोगी,

तेरे दिल की बात जानता हूंँ,

फिर भी मेरी चेतना तुझसे कहती है,


ज़िंदगी के हर मोड़ पे मुझे याद करके तुम रोओगी ।

दिल की बात जुबाँ पे आई है, बन जाओ ! मेरी जीवनसंगिनी ,

नहीं तो तेरा दीवाना चला जाएगा।


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