Vicky Kumar Anand
Classics
जब जब कलम से लिखता हूं तो
यही ख्याल आता है,
इस कलम में ताकत कितनी है,
किसी को शिक्षावान और
किसी को गुणवान बनाती है।
कलम
नये सुबह का नया सवेरा, नए संदेश और नव संवादों से भरा। नये सुबह का नया सवेरा, नए संदेश और नव संवादों से भरा।
किसी को तकलीफ तो नहीं दिया अगर दिया तो क्यों दिया। किसी को तकलीफ तो नहीं दिया अगर दिया तो क्यों दिया।
मैं उनके वात्सल्य, मातृत्व और प्रेम से अभिभूत रहता हूँ। मैं उनके वात्सल्य, मातृत्व और प्रेम से अभिभूत रहता हूँ।
जब भी कोई नहीं साथ होता है मेरे तुम हमेशा ही रहोगे ये जता के गए। जब भी कोई नहीं साथ होता है मेरे तुम हमेशा ही रहोगे ये जता के गए।
हीन भावित मानस पतित रहम रहित मन रहत पथ विहीन। हीन भावित मानस पतित रहम रहित मन रहत पथ विहीन।
क्या अन्याय नहीं ए मन की मासूमियत पर ? क्या अन्याय नहीं ए मन की मासूमियत पर ?
जो आंखें कह नही सकतीं वही मै बात लिखता हूँ। जो आंखें कह नही सकतीं वही मै बात लिखता हूँ।
छोड़ देते हैं जो अपने जीवन में आश उनके जीवन में खिन्नता करने लगती है वास।। छोड़ देते हैं जो अपने जीवन में आश उनके जीवन में खिन्नता करने लगती है वास।।
है बे फिक्र हम चार दोस्त दो साइकल है चार दोस्त हम। है बे फिक्र हम चार दोस्त दो साइकल है चार दोस्त हम।
अपने महत शालीन हृदयग्राही व्यक्तित्व से सदा रहते हैं नमनीय। अपने महत शालीन हृदयग्राही व्यक्तित्व से सदा रहते हैं नमनीय।
आज वो यादें ही हमसे कहते हैं वो दिन भी क्या दिन थे। आज वो यादें ही हमसे कहते हैं वो दिन भी क्या दिन थे।
एक ही जगह बैठकर प्यार की बातें करेंगे क्योंकि हम हैं राही प्यार के हम हैं राही प्य एक ही जगह बैठकर प्यार की बातें करेंगे क्योंकि हम हैं राही प्यार के हम...
शायद किसी को पता नहीं, सरगम उनके सहारों में है। शायद किसी को पता नहीं, सरगम उनके सहारों में है।
मैं स्त्री हूं, इसलिए सबके लिए सोचती हूं मैं स्त्री, मैं मां, मैं बहन, मैं पुत्री हू मैं स्त्री हूं, इसलिए सबके लिए सोचती हूं मैं स्त्री, मैं मां, मैं बहन, मैं प...
झ को पाने के लिए रेत का सहरा हो जाऊँ। झ को पाने के लिए रेत का सहरा हो जाऊँ।
ताकी हम अटूट नींद में अपने सपनों को फिर से जी सकें। ताकी हम अटूट नींद में अपने सपनों को फिर से जी सकें।
तू देख ले दोस्त तुझे उड़ना या बंध जाना है। तू देख ले दोस्त तुझे उड़ना या बंध जाना है।
ये ' दिल' ये 'आंखें' ये 'धड़कन' ये सब घर तुम्हारे ही तो है। ये ' दिल' ये 'आंखें' ये 'धड़कन' ये सब घर तुम्हारे ही तो है।
मत छोड़ो यह दोस्ती, दोनों की जान एक दूजे में बसती है ! मत छोड़ो यह दोस्ती, दोनों की जान एक दूजे में बसती है !
नमन है हर उस नारी को जिसने अपने परिवार के लिए बलिदान दिया! नमन है हर उस नारी को जिसने अपने परिवार के लिए बलिदान दिया!