STORYMIRROR

रंजना उपाध्याय

Abstract

4  

रंजना उपाध्याय

Abstract

ख्वाब

ख्वाब

1 min
294

मेरी ज़िंदगी इक ख्वाब है

ख्वाब बनकर मिला करो,

न चाहत बनकर मिलो

न रुस्वा बनकर मिलो


मेरी ज़िंदगी इक ख्वाब है

ख्वाब बनकर मिला करो

न दर्द बनकर मिलो

न गम बनकर मिलो,


मेरी जिंदगी इक ख्वाब है तो

ख्वाब बनकर मिला करो,

न ईर्ष्या बनकर मिलो

न घृणा बनकर मिलो 


मेरी ज़िंदगी इक ख्वाब है

ख्वाब बनकर मिला करो

सिर्फ मेरा प्यार बनकर

मिलो मेरा अश्क बनकर मिलो


मेरे महबूब बनकर मिलो

मेरे दीवाने बनकर मिलो

मेरी जिंदगी इक ख्वाब है

बस ख्वाब बनकर मिला करो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract