कहानी
कहानी
आज और एक जिंदगी की कहानी सुनी
एक औरत और
उस की जीत की कहानी सूनी !
नाम अलग है किरदार वहीं है
कहानी वहीं है , जो बरसो सें चल रही है
जिसे सहारा होना था...
वहीं बोतल लेके लड़खड़ा रहा था
और एक ये है जो अपने घर की सारी
जिम्मेदारियां अपने कंधों पे लेके दृढ़ खड़ी थी
हां.. एक बोझ भारी होता होगा उसपर .. अपने ही सिंदूर का !
जिस सें उसका सिर जरूर झुकता होगा !
फिर भी नहीं थकती लड़ते लड़ते
हर रोज खड़ी होती है आशा की नई ढाल लेके !.......
कितना करोगी तुम
कितना लड़ोगी तुम
'तेरी हिम्मत के आगे तो अब
उपरवाला भी हार जायेगा
और कहेगा 'तेरी कहानी अब तू ही लिख औरत..
मेरी लिखी हर किस्मत तो.. तू बदल ही देती है !
मन ईशा.
