STORYMIRROR

Rajesh Yadav

Abstract

3  

Rajesh Yadav

Abstract

कौन हो तुम पूछने वाले

कौन हो तुम पूछने वाले

1 min
412

जन्म यहीं का है हमारा

हमें तो किसी का डर नहीं

कौन हो तुम पूछनेवाले

क्या अधिकार है तुम्हारे ?


अगर तुम हो आजाद पसन्द

तो इतनी तुम मे नफरत कैसी?

स्वार्थ में अंधे हुए हो कहो

ये तुम्हारा वतन कैसे ?


कल तक था भाईचारा यहां

तुमने कैसा यह षड्यंत्र रचा

लगाई तुमने नफरत की आग

कहते हो दिल मे प्रेम भरा है


खुल के आ जाओ भी जालिम

उगल दो सब दिल के गरल को

देश है हम सबका यही

तुम मजहबी लहर फैलाओ ना


सिर्फ लहज़ा सख्त होता,

तो हम चुप भी रह लेते राज

मगर तुम्हारे लफ़्ज़ों में तो

"धर्म का ज़हर" छिपा है ?


कह दिया ये धरती मेरी

हमें तो किसी का डर नहीं

कौन हो तुम पूछने वाले

क्या है अधिकार तुम्हारे ?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract