कैसे सह लिया आपने
कैसे सह लिया आपने
कडकती धूप में
वो अपनी चमडी को जलाया है
तभी जाके वो कीतनी मुश्किल से
हमारे लिऐ ये घर बनाया है।
न जाने कीतनी रात खाली पेट सोया है
पी कर पानी अपनी भुख मिटाई है
उन रातो की उस तकिया गबाह है
वो कैसे अपनी आंसु छुपाया है।
गबा है हर एक खुन की बुंदे
जो पसीना बनकर निकला है
खिलाने को दो वक्त की रोटी हमे
जो खुद की तकलीफों को भुलाया है।
कहीं कांटा ना लगे पांव मै ओर कभी दर्द ना हो हमे
इसलिये हमे बाहों मे उठाया है
देख पाएं हम दूर की उनसे।
इसलिये हमे अपनी कंधो पर बिठाया है।
बनाने को जिंदगी हमारी
वो अपनी सपनो को भुलाया है
ओर हमारी होंटो पे एक मकुराहट के खातिर वो अपनी खुशियां को लूटाया है।
हां वो पापा ही हैं हमारे जो अपनी खुन से हमे बनाया है
भगवान तो नहीं हैं वो
मगर भगवान का रुप दिखाया है।।
