STORYMIRROR

archana sharma

Abstract

4  

archana sharma

Abstract

काश

काश

1 min
462

इस काश में वो सब छुपा है

जिसे में पा न सकीं

जिसे में छू न सकीं


ये वो दिवा स्वप्न

जो हकीकत नहीं

एक प्यारा सा भरम

एक मीठा सा जख्म


देता रहता है हर पल

हिलोरें मचलते हुए

हर धड़कन की

हर सांस के साथ

इस पलती हुयी 

हर काश के साथ।


Rate this content
Log in

More hindi poem from archana sharma

Similar hindi poem from Abstract