जन्म तारीख का भेद भर्म
जन्म तारीख का भेद भर्म
आइए आज हम अपनी कथनी सुनाते हैं।
क्या आप मान सकते हैं कि 20 साल तक हमको अपना जन्मदिन की तारीख नहीं पता थी।
क्योंकि हम यह समझते थे कि काका साहब ने जो लिखा दी, वही जो तारीख है वही हमारा जन्मदिन है।
उस जमाने में तो जन्मदिन मनाने का भी रिवाज नहीं था घर में ही सब कर लेते थे।
मां बापू हमेशा बोलते तेरा जन्म पोषी दशम का है।
हम भी वह मान लेते हमने कभी तारीख पूछने की जहमत ही नहीं उठाई ।सोचा ही नहीं जो लिखी है वही तारीख वह अपना ली।
फिर समय हमारी शादी का आया।
एक फोटो जो हीरोइन पोज में हमने खिंचवाई थी।
उसके पीछे हमारा जन्मदिन और जन्म नक्षत्र लिखकर हमारे बापू ने इनको भिजवाई थी।
जब शादी के बाद हमको वह फोटो हाथ में मिली उसके पीछे देखा हमने अपने जन्मदिन की तारीख और नक्षत्र को पाया।
जब वापस बापू से बात करी तो उन्होंने हमको यह भेद बताया
कि तेरा स्कूल में एडमिशन मैंने नहीं काका ने है करवाया।
ना तूने आज तक हमसे पूछा ना हमने तुझे बताया।
20 साल तक जिस जन्मदिन को हम 5 जनवरी 55 को मानते थे।
वह जन्मदिन 20 दिसंबर 54 निकला।
जिसको है हमने बहुत हंसीखुशी से अपनाया।
अब तो गूगल सर्च करके तारीख को भी पक्का कर लिया।
हमने अपना अपना जन्मदिन 20 दिसंबर को कर लिया।
भगवान पारसनाथ जन्म कल्याणक का दिन है वह। वही हमारा भी जन्मदिन है। इसका आनंद अब हम भी उठाते हैं।
और पारसनाथ भगवान की जय जयकार कर जाते हैं ।
अपने आप को बहुत खुशनसीब मान जाते हैं कि उनके जन्मदिन के दिन हमारा भी जन्मदिन आ गया है।
इसे सब घर के बच्चे बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं। और हम सब की शुभकामनाएं हम पाते हैं।
तो यह है राम कहानी। हमारी जन्म तारीख की
जो 20 साल बाद हमारे पास में है आई।
