जीवन-सत्य
जीवन-सत्य
ना रहा हास ना रहा परिहास,
स्तब्ध हो गया शमा आज,
ज्यों जीव चला परमात्मा पास,
परिजनों के रोदन क्रंदन से।।
जब आया होगा जीव धरा,
छाया होगा परित उल्लास,
परिजनों ने भी किया होगा,
बड़ी धूम धाम हास परिहास।।
फिर क्यूं आज रोदन क्रंदन है,
जीव के आज जाने पर,
जबकि जीवन का मूल सत्य,
जो आया है उसको जाना है।।
