जीवन मेरा संग्राम है
जीवन मेरा संग्राम है
संघर्ष बिना भी जीवन है क्या?
कष्ट बिना भी आनंद है क्या?
वह जीवन ही सुखमय नहीं,
जिसमें कांटों का वन नहीं,
संघर्ष भी अमृत बने, यदि स्वाद हो नया-नया।
संघर्ष बिना भी जीवन है क्या?
जिस जीवन में संघर्ष नहीं, वो जीवन बड़ा ही आम है
लक्ष्य मेरा अंजाम हैं, जीवन मेरा संग्राम है।
क्या एक सा रुकना सही।
जिस जीवन में कुछ नया नहीं।
यदि सोच मेरी संकीर्ण बने,
दूरी केवल कदम तीन बने,
ये विश्व नहीं देख पाऊ मै,
यदि लक्ष्य मेरा भी हीन बने।
क्या विश्वजीत बन पाऊं मैं?
यदि स्वयं को जीत ना पाऊं मैं?
जीवन भी सम्राट बने,
यदि चाणक्य भी मुझे मिले।
जिस जीवन का महान लक्ष्य नहीं,
वह जीवन नहीं, नाकाम है।
लक्ष्य मेरा अंजाम है, जीवन मेरा संग्राम है।
यदि जीवन केवल गृहस्थ आम होता।
तो क्या सुभाष, शिवा, संग्राम होता।
जीवन भी महान बने, यदि आदर्श प्रभु श्रीराम है।
लक्ष्य मेरा अंजाम है, जीवन मेरा संग्राम है।
