STORYMIRROR

Fazlur Rahman

Abstract

3  

Fazlur Rahman

Abstract

इतिहास से वर्तमान तक

इतिहास से वर्तमान तक

1 min
216

ये तेरा घुट - घुट के जीना

आँसुओं को खुद ही पीना

और फिर भी झुक के जीना।


ये हमारी दास्ताँ है

जो हमारी पूर्वकथा है!


खून की खेली थी होली

और चिता की थी दिवाली

उस पे अंग्रेजों की गोली


शहीदों हमारा तुम्हे सलाम

अब नही हैं हम गुलाम !


हम हैं उस मिट्टी के वासी

जो नहीं है अब वो दासी

हम सभी हैं देशवासी


निर्पेक्षता ही वो आस्था है

जो हमारा रास्ता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract