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पूर्णिमा पाटील एकलव्य स्वरूप

Abstract

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पूर्णिमा पाटील एकलव्य स्वरूप

Abstract

इश्क़

इश्क़

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मैं और तुम से हम बनें वह है इश्क़,

दिल और दर्द के बीच का फासला है इश्क़,

रजा और सज़ा की दास्तां है इश्क़,

दुआ और अज़ान की आयत है इश्क़

हकीकत से परे कल्पनाओं की उड़ानों सा है इश्क़

धड़कन और तडपन के बीच की डोर सा है इश्क़

आंखों की बोली मौन की भाषा सा है इश्क़

यादों की छुअन सा है इश्क़

त्याग और समर्पण के बीच की गाथा है इश्क़,

इश्क़ पर मैं क्या लिखुं?

एकलव्य स्वरूप की कविताएं पढ़कर

जो महसूस हुआ तुम्हें

वह है इश्क़।


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