इश्क़ परवान
इश्क़ परवान
साथ निभाने का वादा
अब पूरा सा लगता है
तेरे बिना सनम मेरे
जीवन अधूरा सा लगता है
सात फेरे के सातों वचन
अब समझ में आए है
जब हम उम्र के इस
पड़ाव तक आए है
सोचता हूं क्या होता
जब साथ तुम्हारा न पाता
भटकता इधर उधर मैं
शायद यहां तक नहीं आ पाता
जीवन के इस वीराने में
तुम बाहर बन कर आयी थी
अरसा जैसे बित गया हो
शीतल घन बन कर छाई हो
कुछ भी शेष नहीं है
जिसको हम ना पाए हों
याद करो वो दिन जब
हम तुमको नहीं हसाये हो
अब भी बस यहीं दुआ है मेरे यार
युग युगंतर तक चलता रहे अपना प्यार।

