STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy

3  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy

हरि की कुंडलियां

हरि की कुंडलियां

1 min
160

दीपावली के दीपों से जगमग हुआ संसार 

आशा का संचार हुआ मिट गया अंधकार 

मिट गया अंधकार चलाये खूब पटाखे  

लिबराण्डु मक्कार शोर सुनकर के भागे 

कहे हरि कविराय आनंद देख के सबका 

मिंया लॉर्डों के आदेशों की जल गई लंका ।। 

दीपावली के पावन पर्व पर सबको राम राम जी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy