Razada *Khatoon Raaz'*
Abstract
लिख दे जो हक़ीक़त वो कलमकार नहीं हैं
ला दें जो इन्कलाब वो अख़बार नहीं हैं...
सच देखते, सच बोलते, सच सुनते अब कहां
बापू तेरे बंदर भी वफादार नहीं हैं।
अहसास
हकीकत
मंहगाई
'वतन '
'महंगाई '
'अहसास '
' वतन '
'भूख '
भूख
तलवार उठानी ही होगी हर नारी में दबी हुई, दुर्गा को जगानी होगी।। तलवार उठानी ही होगी हर नारी में दबी हुई, दुर्गा को जगानी होगी।।
शीतल सा ,यह चंदन है, यह दिलों का कुंदन है। शीतल सा ,यह चंदन है, यह दिलों का कुंदन है।
वह उड़ गई दूर आसामां में वह आसमां से देख रही थी अपना गांव और अपनी छत....। वह उड़ गई दूर आसामां में वह आसमां से देख रही थी अपना गांव और अपनी छत.......
कुछ अलग तुमसे कर गुजरना मुझे ख़ुद की पहचान बनाना..! कुछ अलग तुमसे कर गुजरना मुझे ख़ुद की पहचान बनाना..!
पछताओगे तब गर ख्वाब सा कोई ख्वाब न देखा। पछताओगे तब गर ख्वाब सा कोई ख्वाब न देखा।
इस बंधन के महत्व को समझते इसकी पवित्रता को जान सकते इस बंधन के महत्व को समझते इसकी पवित्रता को जान सकते
इस बात के कितने ही हैं गवाह, कि ख़्वाब हमेशा अधूरे ही रह जाते हैं। इस बात के कितने ही हैं गवाह, कि ख़्वाब हमेशा अधूरे ही रह जाते हैं।
तुमसे विवाह करने की, कोई रजा ना थी मेरी। तुमसे विवाह करने की, कोई रजा ना थी मेरी।
उसको पलकों पर बिठाया जाता है, क्योंकि हृदयांश देकर, उसका मोल चुकाया जाता है। उसको पलकों पर बिठाया जाता है, क्योंकि हृदयांश देकर, उसका मोल चुकाया जाता ह...
बुनियाद हिले इतने तो कमजोर नहीं। मेहनत के आगे किस्मत का कोई जोर नहीं। बुनियाद हिले इतने तो कमजोर नहीं। मेहनत के आगे किस्मत का कोई जोर नहीं।
खुशनुमा खूबसूरत चमन चाहिए, दिल की धरती को छूता गगन चाहिए। खुशनुमा खूबसूरत चमन चाहिए, दिल की धरती को छूता गगन चाहिए।
रोमांच नहीं होता अब, नए जीवन नई रीति का रोमांच नहीं होता अब, नए जीवन नई रीति का
कुछ ऐसा ही ख़्वाब सजाना तुम, कि मेरे हर ख्वाब में आना तुम। कुछ ऐसा ही ख़्वाब सजाना तुम, कि मेरे हर ख्वाब में आना तुम।
उम्मीद करते हैं मेहनतकश, काम से आगे बढ़े होते हैं अपने उम्मीद करते हैं मेहनतकश, काम से आगे बढ़े होते हैं अपने
बना सके इसे हर कोई अपना यह सपना जो हर सपने से है सुन्दर।। बना सके इसे हर कोई अपना यह सपना जो हर सपने से है सुन्दर।।
अंतर्मन की आवाज से बनती किताबें, सरस्वती माँ की वरदान हैं ये पाक किताबें। अंतर्मन की आवाज से बनती किताबें, सरस्वती माँ की वरदान हैं ये पाक किताबें।
हो सकता हैं की मै उसके लायक न होऊँ मगर आपके लायक हो सकता हूँ।। हो सकता हैं की मै उसके लायक न होऊँ मगर आपके लायक हो सकता हूँ।।
ओढ़कर रखते हैं उम्मीदों को दुशाला बना ओढ़कर रखते हैं उम्मीदों को दुशाला बना
तुम थका सकती हो मुझे हरा कभी न पाओगी तुम थका सकती हो मुझे हरा कभी न पाओगी
पाक है, खास है, अंततः विश्वास है विवाह। पाक है, खास है, अंततः विश्वास है विवाह।