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VIPIN KUMAR TYAGI

Inspirational


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VIPIN KUMAR TYAGI

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हिंदी माथे की बिंदी

हिंदी माथे की बिंदी

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हिंदी हमारे माथे की बिंदी ,हिंदी हमारे सम्मान की प्रतीक,

हिंदी हमारी मातृभाषा,हिंदी हमारे सम्मान की भाषा,

हिंदी भारत के अधिकांश लोगों के बोलने की भाषा,हिंदी पूरे विश्व में भारतीयों के आपस में बात करने की भाषा,

हिंदी हमारे विचारों की भाषा,हिंदी हमारी पूजा अर्चना की भाषा,

हिंदी हमारी प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने की भाषा,हिंदी हमारी सेकेंडरी कक्षाओं में सीखने की भाषा,

हिंदी हमारे ग्रामीण अंचलों में प्रयोग की भाषा,हिंदी हमारे अधिकांश भूभाग की भाषा,

हिंदी हमारे कार्यालयों की भाषा,लेकिन अभी भी हिंदी केंद्रीय कार्यालयों में नहीं बन पाई सारे कार्यों के करने की भाषा,

हिंदी अभी तक नही बन पाई राष्ट्रभाषा,हिंदी अभी तक नही बन पाई उच्च शिक्षा प्रदान करने वाली भाषा,

हिंदी है नीचे न्यायालयों में प्रयोग की भाषा,लेकिन हिंदी आज तक भी नहीं बन पाई उच्च न्यायालयो या उच्चतम न्यायालय की भाषा,

हिंदी प्रत्येक प्रदेश में प्रयोग की नही बन पाई भाषा,हिंदी समस्त भारत की नही बन पाई भाषा,

हिंदी को उचित सम्मान दिलाना है हिंदी को समस्त भारत की भाषा बनाना है,

हिंदी को समस्त शिक्षा की भाषा बनाना है,हिंदी को सभी कार्यालयों व न्यायालयो की भाषा बनाना है

हिंदी हमारे माथे की बिंदी ,हिंदी हमारे सम्मान की प्रतीक,

हिंदी हमारी मातृभाषा,हिंदी हमारे सम्मान की भाषा।


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