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AB Techz

Abstract Inspirational

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हिंदी बोल बोलकर ही तो हम बड़े हुए

हिंदी बोल बोलकर ही तो हम बड़े हुए

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हिंदी के आंचल में

हम घुटनों के बल खड़े हुए,

गुरू जी, पिता जी,

बोल बोलकर बड़े हुए।


फिर क्यों हाथ को मां

अब हेंडू पुकारने लगी,

फिर क्यों टीचर को

गुरू कहने में शर्म आने लगी ।


क्यों भुला रहे हम उस एकता सुत्र को ?

अलंकारी हीरे जिसमे जड़े हुए।

आज क्यों भारत भूमि

हिंदी को दुत्कारने लगी।


हिंदी बोल बोलकर ही तो हम बड़े हुए

भाषा अपनी कैसे छुपाऊं मैं ?

हिंदी पर कैसे अंग्रेजी नकाब लगाऊं मैं ?

होठ कहते हो सैंकड़ों भाषाएं,

दिल से दूर हिंदी को कैसे ले जाऊं मैं ?


जब मैं बना ही हूं हिंद माटी से ,

हिंदी से है वेदना, हिंदी में ही प्राण बसे।

हिंदी बोल बोलकर ही तो हम बड़े हुए।

अपनी हिंदी को कैसे ठुकराऊं मैं ?


मैं हिंदी में सोता हूं,

हिंदी में खाता हूं,

मैं हिंदी में लिखता हूं,

हिंदी में ही गाता हूं,


हिन्दी से है प्राण मेरे।

जय हिंदी, जय हिन्द,

जय हिंदुस्तान गाता हूं।


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