हारेगा कोरोना
हारेगा कोरोना
कितनी खामोशी कितना सन्नाटा पसरा
हुआ है आज इन गलियों में,
कभी गुंजा करती थी जो हँसी ठिठोलियों से,
वो रौनक वो महफिले नजाने कहाँ खो गयी,
कोई तो बता दो ये मेरे शहर को किसकी नज़र लग गयी।
वो सड़क पर यूँ ही किसी का मिल जाना,
चाय की चुस्कियों के साथ दोस्तों का खिलखिलाना,
वो सारी मुस्कुराहटें कहाँ खो गयी,
ये मेरे शहर को नजाने किसकी नज़र लग गयी।
मेहमान के अचानक आने पर खुश हो जाना,
बिना बात के भी दावतों का मज़ा लेना,
वो सारी खुशियाँ आज कहाँ खो गयी,
ये मेरे शहर को नजाने किसकी नज़र लग गयी।
वो शादियों में नाचना गाना,
तीज त्योहारों पर गैरों का भी अपना बन जाना,
वो भीड़ सारी कहाँ खो गयी,
ये मेरे शहर को नजाने किसकी नज़र लग गयी।
क्या दिन आ गया के पाओं में बेड़ियाँ हैं,
जीवन मरण की परिस्थितियां हैं,
बाहर निकलने पे हमारे रोक लग गयी,
ये मेरे शहर को कोरोना की ही नज़र लग गयी।
पर ए कोरोना कान खोल के सुन,
तुझे बनाने वाले वो चीनी थे,
पर अब जिनसे तू टकराया है वो भारतीय हैं,
चीनी को मिनटों में घोल पी जाएंगे।
ये महान भूमि है प्रभु प्रेम करूणा की,
यहाँ कण-2 में ईश्वर बस्ता है,
अरे तू क्या नज़र डालेगा उस देह पर ,
जिसके रोम-2 में राम बस्ता है।
क्यों खुश है तू और क्यों मन ही मन इतराता है,
तू नज़र लगाने आया है पर ये ना भूल,
मेरे बजरंगी की एक नज़र तेरी नज़र को धूल चटायेगी,
मेरे शहर को तबाह करने की ख्वाहिश रखनेवाले,
तेरी बिसात ही मिट जाएगी।
कोरोना हार गया भारत जीत गया,
ये नारा हर जगह गूंजेगा,
बुरी नज़र वाले जल्द ही तेरा मुंह भी काला होगा,
फिर से होगी रौनक खुशियों का यहां बसेरा होगा,
आबाद फिर से ये मेरा शहर होगा, हां ज़रूर होगा।
