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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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ग्रीष्म ऋतु

ग्रीष्म ऋतु

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तपती धूप

जान ले लेगी जैसे

दम निकला।


हाय रे गर्मी

चैन न पल भर

दम घुटता।


ऐसा लगता

आग बरसे जैसे

जला डालेगी।


बर्दाश्त नहीं

इस बार की गर्मी

भारी पड़ेगी।


सहना होगा

हमेशा तो लगता

अबकी बार।


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