ambika .
Abstract
जब कुछ भी
समझ में ना आए
तो समझ लीजिएगा कि
मानव द्वारा
बनाई गई
मनगढ़त
कहानियाँ है
एलियन।
एलियन
परिस्थिति का ...
रंग बरसे
जिंदगी
घर की परवरिश करता है छांव की आकांक्षा में स्वयं को ही घाव देता है कभी भाई कभी बेटा घर की परवरिश करता है छांव की आकांक्षा में स्वयं को ही घाव देता है कभी भ...
तुम मानो या ना मानो इस बात में बड़ी सच्चाई है। तुम मानो या ना मानो इस बात में बड़ी सच्चाई है।
कभी तो मुनासिब मेरा हिसाब करके चल। कभी तो मुनासिब मेरा हिसाब करके चल।
सच हरदम ही जीता है आज भी सच ही जीता है। सच हरदम ही जीता है आज भी सच ही जीता है।
लेखनी से निकलकर बन जाती अमर कहानी ये। लेखनी से निकलकर बन जाती अमर कहानी ये।
अचानक ऐसा कुछ घटित हो जाता, तब भगवान को मानता है इंसान। अचानक ऐसा कुछ घटित हो जाता, तब भगवान को मानता है इंसान।
छपना, पढ़ना, रद्दी के भाव बिकना आखिर तो होना है फना तू बता। छपना, पढ़ना, रद्दी के भाव बिकना आखिर तो होना है फना तू बता।
अपनी बारी में भूल जाते यहाँ तक आभार देना। अपनी बारी में भूल जाते यहाँ तक आभार देना।
तब समझ में आयेगा तुमको प्रेम की बोली खास है यार। तब समझ में आयेगा तुमको प्रेम की बोली खास है यार।
इस बार गांव जाऊंगा क्योंकि, सेठ ने रखे कुछ पैसे मेरे हाथ में है। इस बार गांव जाऊंगा क्योंकि, सेठ ने रखे कुछ पैसे मेरे हाथ में है।
स्त्री तू नहीं है मानव तुझे मानव नहीं माना जा सकता हम हमारा समाज तुझे दे रहा है स्त्री तू नहीं है मानव तुझे मानव नहीं माना जा सकता हम हमारा समाज तुझ...
देह के विलोपने तक और तुम साज बन अगेरती रहोगी। देह के विलोपने तक और तुम साज बन अगेरती रहोगी।
कर्मों से मिले मुझे समृद्धि, जग में हो मेरा यशगान। कर्मों से मिले मुझे समृद्धि, जग में हो मेरा यशगान।
सबके समर्पण का ऋण तुम्हें चुकाना होगा दुर्योधन अब तो तुम्हें राज्य अपनाना होगा। सबके समर्पण का ऋण तुम्हें चुकाना होगा दुर्योधन अब तो तुम्हें राज्य...
लेकिन, उन कुछ ही पलों में वो मेरे अपने होने का अहसास करा जाते थे और ये दर-ओ-दीवार लेकिन, उन कुछ ही पलों में वो मेरे अपने होने का अहसास करा जाते थे और...
दो संस्कृतियों की बगिया का फूल है जिसकी महक सेबेटी ही है जो जीवन पर्यंत दो कुलों को दो संस्कृतियों की बगिया का फूल है जिसकी महक सेबेटी ही है जो जीवन पर्यंत...
प्यार और सम्मान का हक़ है बुज़ुर्गों को, फिर उन्हें बरगद की शीतल छाँव बनते देखा है ! प्यार और सम्मान का हक़ है बुज़ुर्गों को, फिर उन्हें बरगद की शीतल छाँव बनते द...
सरकारी नौकर बनना मानों फटी जेब वालों का काम अटका। सरकारी नौकर बनना मानों फटी जेब वालों का काम अटका।
और फटी जेब को आंख दिखाते बदलते रिश्तों को जीते हैं ! और फटी जेब को आंख दिखाते बदलते रिश्तों को जीते हैं !
ऐसा ही होता रहा यदि तो जेब फटी ही रह जाएगी। ऐसा ही होता रहा यदि तो जेब फटी ही रह जाएगी।