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Vichitr Choudhary

Inspirational


4.0  

Vichitr Choudhary

Inspirational


एक सुबह जब इश्क हुआ था !

एक सुबह जब इश्क हुआ था !

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चार बजे थे सुबह के,जब इश्क हुआ था। 

एक पहाड़ से उतर रहे थे, लौट रहे थे शूटिंग से कोहरा था,

 धुंधली - धुंधली सी रौशनी थी कार की दोनों बत्तियाँ। 


आँखें मल - मल के राह हूँढ रही थीं 

नींद में भी तुम थोड़ा - सा मुस्काई वक्त इबादत का था वो,

 सच कहने की बेला थी चार बजे के आसपास का वक्त था 

एक सुबह जब इश्क हुआ था !


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