STORYMIRROR

Ashish Sharma

Abstract

4  

Ashish Sharma

Abstract

एक सोच

एक सोच

1 min
303

ये वक़्त भी एक दिन टल जाएगा

घबरा मत, ये मंज़र बदल जायेगा


सिर्फ हौसला ही तेरे काम आएगा

सावधानी रख, सब ठीक हो जाएगा


इस जलती हुई कड़ी को तोड़ दे तू

तेरा ये प्रयास, कमाल कर जाएगा


कुछ पल के लिए कर खुद को जुदा

इस बीमारी को नाकाम कर पाएगा


गर यही सोच लें आज सभी अपने

आने वाला कल सुनहरा कहलाएगा


फिर आया है मौका एकजुट होने का

भारत, दुनिया को मिसाल दे जाएगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract