STORYMIRROR

SHUBHANGI SHINDE

Abstract

4  

SHUBHANGI SHINDE

Abstract

दिल तो बच्चा है जी...

दिल तो बच्चा है जी...

1 min
276

ये तितली की तरहा उडना चाहता है

सुरज की रोशनी सा चमकना चाहता है

हवाॅं से भी तेज दौडना चाहता है


बादलो को चीर के उॅंचाई मे मुकाम बनाना चाहता है

फिर भी अपनों के साथ जीना चाहता है

हा ये दिल बच्चा है


मासूम है मोहब्बत का मारा है

ये सिर्फ प्यार समझता है

दिमाग की शातीर बाते नहीं समझता

बस मन मैं बसे प्यार भरे जज्बात समझता हैं


दर्द में मुस्कुराना समझता है

अपनों के साथ अपनेपनसे जीना समझता है

हाँ ये दिल बच्चा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract